Thursday, 31 December 2015

••• Bekhudi •••

••• Ajnabee •••

Jigneshsinh Thakor's Special Blog In Welcome

••• मेरी जिंदगी एक कटि पतंग है •••



किसी रोज मिलों तन्हाई मैं....
कितनी बाते करनी हैं .....
तेरा हाथ पकड़ कर रोना हैं.....
तेरी आँखों मैं खोना हैं...

फिर आँखों से कुछ कहना हैं..
और लफ्जों ने चुप रहना हैं...
आंसू भी जिद करते हैं...
इन्हें तेरे सामने बहना हैं
किसी रोज मिलों तन्हाई मैं
तुम से बहुत कुछ कहना हैं....

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साथ चले नहीं उसके,लेकिन उसके बिना जीना मुश्किल है
उसकी जरुरत नहीं हैं,लेकिन उसके बिना जिंदगी अधूरी हैं

आंसूं नहीं बहाते.लेकिन उसकी यादों में दिल रोता हैं
क्या करू में..?क्यों मुझे ऐसा अजीब सा होता हैं




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