Thursday, 31 December 2015

••• मेरी जिंदगी एक कटि पतंग है •••

Jigneshsinh Thakor

कामयाबी तक जाने वाले रास्ते सीधे नहीं होते लेकिन कामयाबी मिलने पर सभी रास्ते सीधे हो जाते हैं।

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अजीज़ इतना ही रखो कि जी संभल जाये

अब इस क़दर भी ना चाहो कि दम निकल जाये


मोहब्बतों में अजब है दिलों का धड़का सा 


कि जाने कौन कहाँ रास्ता बदल जाये 



मिले हैं यूं तो बोहत, आओ अब मिलें यूं भी 

कि रूह गरमी-ए-इन्फास* से पिघल जाये 
मैं वोह चिराग़ सर-ए-राह्गुज़ार-ए-दुनिया 
जो अपनी ज़ात की तनहाइयों में जल जाये 

ज़िहे! वोह दिल जो तमन्ना-ए-ताज़ा-तर में रहे 

 खुशा! वोह उम्र जो ख़्वाबों में ही बहल जाये

हर एक लहज़ा यही आरजू यही हसरत 

जो आग दिल में है वोह शेर में भी ढल जाय 

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••• Bekhudi •••

••• Ajnabee •••

Jigneshsinh Thakor's Special Blog In Welcome

••• मेरी जिंदगी एक कटि पतंग है •••



किसी रोज मिलों तन्हाई मैं....
कितनी बाते करनी हैं .....
तेरा हाथ पकड़ कर रोना हैं.....
तेरी आँखों मैं खोना हैं...

फिर आँखों से कुछ कहना हैं..
और लफ्जों ने चुप रहना हैं...
आंसू भी जिद करते हैं...
इन्हें तेरे सामने बहना हैं
किसी रोज मिलों तन्हाई मैं
तुम से बहुत कुछ कहना हैं....

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साथ चले नहीं उसके,लेकिन उसके बिना जीना मुश्किल है
उसकी जरुरत नहीं हैं,लेकिन उसके बिना जिंदगी अधूरी हैं

आंसूं नहीं बहाते.लेकिन उसकी यादों में दिल रोता हैं
क्या करू में..?क्यों मुझे ऐसा अजीब सा होता हैं




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